Dimension of Life.

सन्देश

Image-mynthdiary पृथ्वी पर एक चिट्ठी आई है सन्देश है कि उसकी आकाशगङ्गा के कुछ हिस्से अपनी जगह से गायब हैं पृथ्वी शान्त है दो जोड़ी और एक जोड़ी पैरों वाले से ज़्यादा अब उस पर किसी लङ्गड़े के पैर का स्पर्श भारी है दरख़ास्त है उन हिस्सों को बाँधकर रखने वालों से सृष्टि की लोरियाँ… Continue reading सन्देश

Memories

सुराख़

Image - mynthdiary पाँचवी कक्षा में थी जब नाक छिदवाने का शौक चढ़ा था दादी से सङ्क्रान्ति पर काले स्केच पेन से निशान बनवाकर घण्टों राह देखी थी कि कब वह दुबला पतला सा आदमी अटैची में रखी नग वाली कीली रख दे मेरे नाक पर वह आया नाक भी छिद गई कसम से इतनी… Continue reading सुराख़

दृश्य-अदृश्य

बिजली गुल रहेगी

Image-mynthdiary एक अलक्षित दृश्य देख सकते थे उसके भीतर तब तक बिजली ही गुल हो गयी कोई कितनी दफ़ा घूरता भौहें चढ़ाये पर उसके माथे पर बनी मीनार को कभी न मिटा सका घड़ी की दो सुईयों के बीच में कोणों के साथ टू-डायमेन्शनल लईये चने चबा चुकी थी वह जब समय आया कि हाथ… Continue reading बिजली गुल रहेगी

Dimension of Life.

भार-मुक्त

Image-mynthdiary यह एक आधी रात की हल्की सी बात है खिड़कियों पर बारिश की बूँदें भारी हैं ज़ीरो वाट की हरी और लाल बत्तियाँ बिजली की चमक पर भारी हैं ठीक वैसे ही यदि मैं आपसे कहूँ कि मेरे अपने ही हाथ मेरे हृदय पर भारी हैं देखिये मैं मानती हूँ कि जब भार बढ़ने… Continue reading भार-मुक्त

दृश्य-अदृश्य

दृश्यों के घेरे में

Image-Pinterest रेडियो सुनता हुआ एक व्यक्ति दोमुही भाषा में ध्वनि तरङ्गों की खिल्ली उड़ा रहा है मुझे शक है अगर मैं कुछ बोला तो वह टूट पड़ेगा मुझ पर ऐसे समय में मेरा गूँगा रह जाना उचित होगा मुझे पता है कि कुछ अनचाहे दृश्य मेरी दृष्टि को बाँध लेना चाहते हैं और मैं पहले… Continue reading दृश्यों के घेरे में

Dimension of Life.

गिरते हुए

मेरे पैर पर चढ़ने को भागकर आती हुई चींटी को उङ्गली मारकर गिरा देती हूँ हालाँकि पानी में बहकर जाती हुई को सूखी पत्ती या लकड़ी से बचा लेती हूँ लेकिन मेरी असुरक्षा के आगे मैं महानता की ढेर बनकर भुरभुराकर गिरती हूँ मुझे ऐसे ही गिरना चाहिए हर बार मैं धूप में धूप की… Continue reading गिरते हुए

दृश्य-अदृश्य

स्वप्न के घोंसले

Image-Pinterest स्वप्न में पिता घोंसले के बाहर खड़े हैं मैं उड़ नहीं सकती माँ उड़ चुकी है कहाँ कुछ पता नहीं मेरे आगे क़िताब-क़लम रख गया है कोई और कह गया है कि सूरज ढलने तक लिख दूँ एक कविता या लिख दूँ माँ का पता स्वप्न भर तक माँ खोई रहती है जाग में… Continue reading स्वप्न के घोंसले

Dimension of Life.

अकेले की भीड़ में

Image-mynthdiary नींद से जागकर मुझे जाना होता है मेरे अकेले की भीड़ में मुझे पता है कि वहाँ पहुँचते ही मेरी कविताओं के अर्थ बदल जाते हैं और मुझे ज़रा सी भी लज्जा नहीं आती उनकी बातों को उधेड़कर रखने में कभी-कभी मेरे अकेले की भीड़ में मेरा दम घुटने लगता है और खुद ही… Continue reading अकेले की भीड़ में

Love-Real & Imaginary

ज्वर

Image-Pinterest जिस दिन कपार से लेकर पाँव तक डूबी हुई ज्वर से भाग रही थी और दौड़ती ही चली जा रही थी ढूँढने को ठण्डी पट्टियों वाली सड़क किसी ने पुकारा था पीछे से यह कैसे हुआ कि मैंने सुना ही नहीं हाय प्रकृति! सुना तो लोगों ने भी नहीं न पढ़ा तुम्हें पीड़ा में… Continue reading ज्वर

Dimension of Life.

चार चित्र, कथा एक

Image-Pinterest हर किसी की नींद मीठे स्वप्न नहीं देती उनके सिरहाने सिर्फ़ लोहा होता है स्वप्न जिसके सामने सभ्य और असभ्य मृत पड़े मिले उनका आँखों में डबाडबाकर भरे रहना घातक हो सकता है एक दिन मेरे दरवाज़े पर किसी चिट्ठी की दस्तक थी खोलने से पहले उसकी साँस हलक पर थी (ऐसी चिट्ठियों को… Continue reading चार चित्र, कथा एक