Awards, Love-Real & Imaginary

द जैपनीज़ वाइफ़ — धूप की दैनन्दिनी

मियागीएक दिनमैं तुम्हारे पास आऊंगानदी में तैरती हुई एक नाव की तरह~ स्नेहमोय “द जैपनीज़ वाइफ़” सिनेमा के रूप में कविताओं की एक लम्बी श्रृंखला है। जिसमें अनुराग, स्नेह, पीड़ा और रिक्त पड़ी कामोत्तेजना के साथ कभी ना समाप्त होने वाली मृत्यु है। किंतु उस मृत्यु में कोई कुतूहल नहीं कोई व्यग्रता नहीं बस एक […]द… Continue reading द जैपनीज़ वाइफ़ — धूप की दैनन्दिनी

आदिम स्वरूप के लिए

सहमति

लो बीत रहे हैं ये दिन और देख सकती हूँ कि आने वाले दिनों में जब मैं छोड़ चुकी होऊँगी लिखना हो सकता है मैं रेंग जाऊँ इन चीटियों के साथ जो मेरे अचेतन मन में जमा करती हैं लाशें या उड़ ही जाऊँ उस चिड़िया के साथ जो कभी भी मेरे छत पर दाने… Continue reading सहमति

प्रकृति के लिये

ईश्वर की पात्रता

Photograph: Google लो लौटा रही हूँ तुमको ईश्वर मेरी प्रार्थनाएँ सुनने का ऋण अब देख लो हिसाब-किताब लोगों ने कहा तुम्हें चाहिए एक सुगन्धित कविता जो कि मेरे पास तो नहीं रखती हूँ अब सामने यह गरीब भूख की बासी कविता सिंहासन छोड़ो ईश्वर आओ पालथी मार कर साथ में तोड़ते हैं निवाला तुम भी… Continue reading ईश्वर की पात्रता

आदिम स्वरूप के लिए

आवश्यकता के अतिरिक्त

Photograph: Gabriel Isak गति आरम्भ करने के लिए विराम आवश्यक है आवश्यक है ठोकर लगना सम्भलना न सम्भलना हमारे ऊपर टूटे कन्धों के मानिन्द दूसरा कन्धा नहीं होता आवश्यक है टूटे पर ही सिर टिकाना यात्राओं में लिखे गए शब्द अर्थ में धीरे-धीरे डूबते हैं लेते हैं हजारों यात्राओं का समय बलवान समय जो किताबों… Continue reading आवश्यकता के अतिरिक्त

Dimension of Life.

आकार ढूँढ़तीं बिन्दुएँ

Photograph: Google आँखों में बासी पानी हो तो, किसी और के कन्धों पर न ढुलके तो ही अच्छा सारी बातें लिखी गईं और नहीं भीअब कम लिखकर बुदबुदाने को ज़्यादा ढूँढ़ती हूँ गहरी नींद में सुनाई देने वाली धुनों का सूत्रपातसुबह तुलसी की पत्तियाँ तोड़ते हुए ख़त्म हो जाता है मेरे इलाके का नया पोस्टमैन… Continue reading आकार ढूँढ़तीं बिन्दुएँ

आदिम स्वरूप के लिए

द लास्ट लीफ

Photograph:mynthdiary मैंने धरती हाथों से छुई हाथ आया किसी कौवे के मुँह से छूट कर गिरा माँस का टुकड़ा जहाँ भी कुछ न पाने की इच्छा से हाथ रखा वहीं हाथों को जकड़ लिया अतृप्त संज्ञाओं ने कभी भी करवट ली है तो देखी हैं दोनों तरफ़ कोड़ों से कराहती हुई नग्न पीठें कुछ खो… Continue reading द लास्ट लीफ

आदिम स्वरूप के लिए

स्वीकारोक्ति

मैं तुम्हारे पाँवों के नीचे सड़क बनकर बिछा हूँ और तुम एक ढीठ अड़ियल यातायात के नियमों का पालन करते हुए मेरे हृदय पर आघातें करती हुई चली जा रही हो तुम ज्ञान हो अब तुम्हें रोकना निरर्थक होगा तुम्हें सीख लूँगा अब बिना किसी दण्ड के तुम सजल थी उड़ गई एक दिन भाप… Continue reading स्वीकारोक्ति

आदिम स्वरूप के लिए

उदास औरतें

उदास औरतेंसूना आसमान देखने कासमय नहीं पातीं अतीत में झाँकती हैंतो छूट जाता हैहाथ से सूप डगमगाती है पृथ्वीलगते हैंभूकम्प के झटके उदास औरतेंजला लेतीं हैं जीभऔर निपोरती हैं दाँत समय से पहले भागती हैंसमय से पहले पहुँचकरसाड़ी में फँसा लेती हैं कीलें उनकी पलकें पत्थर सी भारी हैंफिर भी बचा लेती हैं वेपानी में… Continue reading उदास औरतें

आदिम स्वरूप के लिए

आदमी से ही डरा हूँ, आदमी सा मरा हूँ

Photograph: Pinterest आदमी के बीच रह कर आदमी से भरा हूँ आदमी से ही डरा हूँ आदमी सा मरा हूँ अपनी ही मौत पर मैं गाता हूँ मर्सियाँ फूँकता हूँ पुतले फिर जलाता हूँ मोमबत्तियाँ ज़रा-ज़रा सी बात पर फेंकता हूँ शब्द बाण से मैं सिद्ध हूँ औक़ात पर तुम सिद्ध करो प्रमाण से नीयत… Continue reading आदमी से ही डरा हूँ, आदमी सा मरा हूँ

दृश्य-अदृश्य

काँटा

Photograph: Pinterset एक न एक दिनहम ढूँढ ही लेंगे वह जगह जहाँ बीच रास्ते में अटके हैंकुछ उच्चारित मन्त्र,पुरखों को अर्पित निवाले वह जगह जहाँ सेघबराकर लौटते हैं पक्षी,जहाँ है विस्मृतियों का टीला जहाँ एक बूढ़ा आदमीजो दिन में देख सकता है,अँधेरे में माँगता है मुक्ति एक जगह जहाँबिना ईंट-पत्थर लगाये बनेदेवघर में कोई नहीं… Continue reading काँटा