Love-Real & Imaginary

The Girl with perfect glabella

When I was about to jump in a chasm, then you came to rescue me. My life was like a poetry without metaphor, but you were always there stood by me. Albeit there is a sun shines always for everyone, but there is another sun shines on your perfect glabella, and I walk in pride… Continue reading The Girl with perfect glabella

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Dimension of Life.

एक आधी छोड़ी हुई औरत

माघ भी आधी रात से लग गया है, दो दिन से गेंहूँ धुल के रखा है, अब तक सूख ही न पाया है। तिल भी तो धोना था, पर कैसे सूखेगा सब? आँसू भी अजब है बिना धूप के सूख जाते है। दिन इतना भारी हो चला है, सब काम निपटाती हुई, सोचती हूँ कि… Continue reading एक आधी छोड़ी हुई औरत

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Poetry featured in the book “The last flower of spring”

Hey everyone!! I'm much obliged to tell y'll that my poetry "You:An unauthorised creator" is now published in the book "The last flower of spring". It is a poetry anthology on loneliness and published by poempajama in association with Delhi poetry slam. The book launch took place in Jaipur at stepout cafe and book lounge… Continue reading Poetry featured in the book “The last flower of spring”

Dimension of Life.

अक्षर-शब्द-जीवन

तुम्हारी आहटों को जब- जब उकेरने का प्रयत्न करती थी मैं, तब-तब निकलते थे कुछ अक्षर उनमें। उन अक्षरों को समेटे हुए मैं, ले जाती थी उस समुन्दर के पास। जिस के पानी में भीगकर, सभी अक्षर आतुर हो जाते थे, कि उन्हें मैं झट से शब्द बना दूँ। ताकि जैसे ही कोई उनका उच्चारण… Continue reading अक्षर-शब्द-जीवन

Dimension of Life.

शीर्षक तुम ही हो

इक जरा कविता के पन्नों सी सिल जाओ तुम, मैं आवरण पृष्ठ बन जाऊँगा। आयेगा जो तुमको पढ़ने कोई, मैं पलट तुम्हें पवन बन जाऊँगा। गायेगा जब कभी तुमको कोई, मैं पार्श्व धुन बन जाऊँगा। तुम आजाद वायु सी बहती जाओ तो, मैं पंछी बन संग उड़ जाऊँगा। जिस अवशेष की हो तुम शेष; जैसी… Continue reading शीर्षक तुम ही हो

Love-Real & Imaginary

मेरे काल्पनिक प्रिये!

सुनो! तुमने उन चिड़ियों को सुना क्या? जो अभी-अभी गीत गाकर गईं हैं। उन्हें सन्देह हो गया था, कि मैं तुम्हारी कल्पना में खोई हूँ। इसलिए तुम्हें भी सुनना होगा; वो गीत, जो मैं सुनती हूँ प्रतिदिन। हाँ! जब मैं रच रही होती हूँ तुम्हें, थोड़ा-थोड़ा। जब मैं तुम्हारे गुणों को गढ़ रही होती हूँ… Continue reading मेरे काल्पनिक प्रिये!

Love-Real & Imaginary

कहना था कि….

दिल कागज़ी है तुम्हारा.. तुम थाम लो हाथ मेरा। फिर उड़ो.. रुको... देखो, वो घर सजा तुम्हारे ख्वाबों में और मयस्सर करो बन्द अल्फाज़ तुम्हारे, जश्न मनाये ये रूह जिस्म लिबासों में। बयां कर न सको तो देखो... चाह भर के मेरी आँखों में। सदियों से दबी आरजू हो या अभी-अभी याद आई कोई शिकायत,… Continue reading कहना था कि….

Dimension of Life.

रचनायें

जब रचनायें बोलती हैं.. वह सत्य जो तुमने अश्रु घूँट के साथ निगल लिया था, उस समय तुम खुद को, एक पाप करने से फिर रोक लेते हो। रचनायें रहती हैं..जब तुम्हारे पास कोई नही होता, तुम्हारा दु:ख बाँटने वाला, उस समय तुम खुद को, अकेला कहने से फिर रोक लेते हो। रचनायें उमड़ती हैं..जब… Continue reading रचनायें