She 

1. She was motivating everyone. 

Being a cancer patient, her words had penetration power more than the Gamma rays. 


2. No one could forget her. 

She was such a ‘getting in your head’ thing. 

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Do we? 

​We often fell for that one person who is good enough in only one of our “most expected to others” things even if that one doesn’t deserve to.

(Here in this thought the condition is applied on same gender and opposite too. The word ‘fell’ is not only in the sense of love, it can be anything… Attachment, Attraction, friendship, etc.)

Let me know in the comment box. 😊

दादा बहुत याद आ रहे हो

पुराने वाले घर की चौखट पर दीया रखते ही महसूस हुआ कुछ, 

पता नहीं क्यूं, लगा कि किसी ने टोका हो, “थोड़ा किनारे ही रखना”…. 

पलट कर देखा तो बस अंधेरे को चीरती रोशनी दिखी, 

हाँ दादा! तुम्हीं याद आ रहे हो…. 

कितने साल हो गए तुम्हारा ‘हरमुनिया’ (हारमोनियम) सुने हुये, 

“सुनो दादा!, कैसे बजा लेते थे तुम कँपकँपाती हाथ से”, 

एक भी सुर इधर-उधर नही। 

कितना सिखाने की कोशिश की थी तुमने मुझे और दीदी को, 

पर मैं नासमझ मन नही लगाती थी। 

मेरा मन तो गुड्डे-गुड़ियों की शादी करने में लगता था। 

तुम्हें नही पसन्द था मेरी सहेलियों का घर पर इकट्ठा होना.. 

कितना डाँटते थे तुम उनके सामने ही, 

मैं खीज जाया करती थी। 

अच्छा अब कोई सहेली नही आती है, “देख लो खुद ही”। 

दादा सच में याद आ रहे हो। 

बरफ सी ठंडी में सुबह ही नहा लेते थे तुम, 

तुम्हारा पानी भर के मैं भी खड़ी रहती थी वहीं, 

कहीं फिसल न जाओ तुम। 

तुम्हारा कपड़े का दुकान लगवा कर तस्वीरें पोंछना याद आ रहा है। 

एक पन्ना कुरान का और एक पन्ना गीता का फटाक से पढ़ लेते थे, 

कैसे कर लेते थे तुम सब अपनी झुकी हुई कमर के साथ। 

तुमने ही सिखाया था खाने से पहले कुत्ते, बंदर और गइया को खिलाना। 

अब बंदर से बहुत डरती हूँ दादा। 

तुम्हारे जाने के बाद वो कुत्ता आया था, 

ढूंढ रहा था तुम्हे, गइया भी रोई थी, बंदरों ने घेर रखा था। 

दादा बहुत ज्यादा याद आ रहे हो। 

पीपल के पेड़ और मंदिर अब भी वहीं हैं जहाँ, मुझसे झाड़ू लगवाते थे तुम। 

दोपहर में घंटी की टन-टन पर हम लोग कुल्फी खाया करते थे। 

दादी कितना डाँटती थी। 

अब भी याद आ रहा है तुम्हारा रोटी का टुकड़ा दाल में डाल कर खाना, 

पंखा झलते-झलते मुझे भी भूख लग जाती थी। 

आज भी वो खुशबू मेरे आसपास आती है कभी कभी। 

दादा इतना क्यूँ याद आ रहे हो? 

मेरे स्कर्ट पहनने पर तुमने नाराजगी जताई थी, 

तब मुझे बहुत गुस्सा आया था। 

दादा मैंने सूट पहना है आज, देखोगे नहीं मुझे? 

तुम्हारे दाँतों का नकली सेट साफ करती थी मैं, 

तुम्हारे नाखून काटती थी मैं। 

ठंडी में स्वेटर पहना, रजाई ओढ़ा कर बैठ जाती थी मैं, 

फिर तुम उर्दू की कहानियां सुनाते थे, 

कितना सुकून था उनमें….. 

बस याद आ रहे हो। 

तुम्हारे जाने के कुछ दिन पहले मैं घबरा गयी थी, 

तबीयत के चलते तुम्हें छोड़ना पड़ा था सब,…. 

‘हरमुनिया’, किताब, दुकान, कुल्फी। 

अब पता चलता है कि कितना मुश्किल रहा होगा। 

तुम्हें ठंडी में भी गर्मी लगने लगती थी। 

रात को खांसते-खांसते मुझे जगाते थे, मुझे डर लगता था बहुत फिर भी, 

तुम जगते थे तो मैं भी जग जाती थी। 

सब कुछ बदल गया है अब हम “पक्के-घर” में रहते हैं। 

आज दिल कर रहा है कि एक बार तुम फिर आ जाओ, 

मुझे बचपन में जाना है दादा, मुझे बड़ा नही होना, 

मुझे तुम्हारे साथ रहना है, 

दादा अब बहुत याद आ रहे हो। 

शून्य 

मकान की दीवारों में, मुकाम के दीदारों में, 

हो गया है शून्य से मिलन मेरा…. 

बस तुमसे मिलना बाकी है। 

जिस्म शून्य, रूह शून्य, 

साँस शून्य, आभास शून्य, 

रात के अँधियारों में, कूचे और गलियारों में, 

हो गया है शून्य से मिलन मेरा…. 

बस तुमसे मिलना बाकी है। 

भूत शून्य, वर्तमान शून्य, 

नया शून्य, इतिहास शून्य, 

इंद्रियों के मकड़जालों में, तेरा ज़िक्र करने वालों में, 

हो गया है शून्य से मिलन मेरा…. 

बस तुमसे मिलना बाकी है। 

Versatile blogger award 

Hello friends! It’s again a nomination time. This time it’s from Maya Bhat.I am thankful to her for nominating me. Please visit her website https://mayabhat.wordpress.com/ for a great experience. 

Following are the few steps for those who have been nominated for this Award.

1.Thank the blogger who has nominated you and share his or her link.

2.Nominate 10 or less than 10 other blogger friends for this award with their link.

3.They must be informed about it.

Three things about me. 

1. I love bingo madangles tomato flavour 😂. 

2. I am a fan of EI. 

3. I am a good cook even though I don’t like to 😏. 

So time for my nominees…. 

jazzizzin

TechFlax

Vedant Dave

Rock the blogging 🤘🙂🤘…. 

लोग क्या कहेंगे….. 

अकेली स्त्री, सोच में पड़ी, 

भुनभुन-भुनभुन मन में कुछ बुदबुदाती…. 

धूप में बैठी, गीले उलझे बालों को सुलझाती, 

“अरे! सुलझ ही नही रही ये उलझन… 

और ये उलझी लट भी। 

हद् है!…. च् च् च्… 

लो दाल चढ़ाई थी, जल गई…..

ये भी इक आफत है। 

बूढ़ा बाप चिल्लायेगा अब, 

देगा दारू पीकर दो-चार गाली”। 

यौवन की अवस्था में वैधव्य झेलती, 

पेट में पलते नये उम्मीद को निहारती, दुलारती, खुश होती, रो देती, चिल्ला उठती…. 

“हट! ये कौआ कितना कांव – कांव करता है”। 

ठंडी आने को है…. 

बबुआ के लिए गरम कपड़े बनाने हैं उसको, 

पर पड़ोस वाली चाची अब सलाई ही नही देती हैं, 

वो भी नही देगी अब सींक वाली झाड़ू। 

बक्सा साफ करते – करते उसको मिल गया पुराना ऊन और उसकी लाल बिंदी…. 

“अरे! हाँ।”, चार महीने से ढूंढ रही थी, बबुआ के बापू ले आए थे शहर से चमकदार बिंदी। 

दौड़ के शीशे के पास गयी… 

माथे पर सजाने चले हाथ रुक गये, 

नही – नही पाप है ये, इसे छूना भी पाप है। 

डर से छूट गई बिंदी, गिर गई नीचे। 

“आई बापू!, बापू को दवाई भी देनी है”। 

दौड़ गई फिर से, 

छोड़ दिया सब कुछ… 

उमंग, सुंदरता, सजना-संँवरना… 

छोड़ गई वो सब बिना सुलझाये, 

“लोग क्या कहेंगे” के डर से। 

ये उलझन सुलझती ही नही…. 

छोड़ो! “लोग क्या कहेंगे!” 

Mystery blogger award nominations 

 

Thank you so much Ben Aqiba for nominating me. I love all your posts. 

If you want positivity and exciting hacks in your life please go through his blog. Thanks again Ben Aqiba

Rules:
1.Feature the award logo/image on your post.√

2.List the rules.√

3.Thank the blogger that nominated you.√

4.Tell the readers 3 things about yourself.√

5.Mention the creator of the award and give a link as well — Okoto Enigma.√

6.Answer the questions provided.√

7.Notify your nominees by commenting on their blog.√

8. Nominate 10-20 bloggers and notify them by commenting on their blog.√

9.Ask the nominees 5 questions of my choice with one weird/funny question (specify).√

10.Share and link to your best post(s) √
Three things about me

1. I am graduates in mathematics. 

2. I am suffering from “monkeyphobia”. 

3. I love music. 

     My answers for questions !
1-What is your favorite book and Why? (Gallian’s Abstract Algebra. It has all sort of stuff for a beginner.) 

2-Where you see yourself in 22 years ?

(In search of stability well not a stationary point😂. ) 

3-What is for you the most important thing in life ?

(Success and independence. ) 

4-If you have only one more day of life, what would you do that day ?

(I will make my confession for my loved ones and spend all my money on needy people.) 

5-Are you doing the job you love?

(Not now.) 
My best posts
Well it’s lil bit awkward but I’ll go for it. 

I love my poetry “I am not afraid of…” & “Oh! This can’t be my story”. 

My Nominees:
Rekha Sahay

simple Ula

The Godly Chic Diaries

Nathprasad Dhanwant   

 

Questions for my nominees

1- Name that one topic you find difficult to write on. 

2- Tell your favourite blogger name. 

3- Your first quick thought on my post? 

4- If you are given a super power, What will be the first change you want to make in yourself? 

5- What is the hardest thing you did ever? 

I am not afraid of….. 


​I am not afraid of losing you,

I am afraid of losing the one who loves you. 

I am not afraid of dying,

I am afraid of the consequences after.

I am not afraid of fighting lone with fear, 

I am afraid of my disappeared tears along with. 

I am not afraid of if someone calls me stupid, 

I am afraid of someone calls me looser if. 

I am not afraid of keep trying worthlessly, 

I am afraid of the failure getting around. 

I am not afraid of writing opening myself up,

I am afraid of then you will never be mine, 

I am not afraid of going out of reach to this world, 

I am afraid of that I am going. Keep going.. and you won’t stop me…. 

चाँद – एक तारे की आस


मैं जाना चाहता था उस चाँद के पास, 

बरसों से थी मेरे मन की बस एक यही आस, 

मैं चूम सकता उसकी चाँदनी को काश, 

मैं अपनी टिमटिमाहट से भर देता उसका आँचल आकाश। 

आज भी रहता है ध्रुव उस चाँद का हमेशा खास, 

मैं क्यूँ नही जा सकता उस चाँद के पास। 

इंतज़ार करते – करते मेरा आखिरी वक्त भी आ गया था, 

मैंने वक्त से की लड़ाई उस चाँद के लिए, 

उसने भी मुझसे दो- दो हाथ कर लिए। 

हाँ तब मैं थोड़ा टूटा, बस थोड़ा सा… 

बचे-खुचे मेरे शरीर में अब भी एक आस थी, 

चाँद को छूने के लिए दुगुनी रफ्तार से, 

चल पड़ी मेरी साँस थी। 

चाँद तो नही आया पर, मेरे जाने का वक़्त फिर आने लगा था…. 

इस बार मैं थोड़ा और टूटा, 

पर चाँद से मिलने का मेरा नशा न छूटा। 

कोशिशें हजार हुई, किस्मत मेरी तार-तार हुई, 

लेकिन चाँद से मेरी आँखें कभी न चार हुई। 

मैं और टूटा, पूरा टूटा और एकदम टूट गया… 

आज चाँद के आँचल का एक सितारा फिर छूट गया। 

मैं टूटकर मर रहा था, नीचे खड़ा इन्सान मुझे देख अपने लिए दुआ कर रहा था। 

मैंने सोचा जिस तारे की कभी आस न पूरी होगी, 

उसे देखकर क्या इन्सान की ख्वाहिश अधूरी न होगी। 

मैं जहाँ भी गिरा हूँ, कोई नही जान पाया, 

चाँद को भी ज़रा सा अनुमान न हो पाया। 

मैं खुश हूँ यहाँ भी, क्योंकि चाँद अब भी दिखता है, 

पढ़ने वालों शौक से पढ़ो, 

ये सितारा भी लिखता है। 

किसी ने कहा है कि चाँद शरमा कर बादल में छिपता है, 

पर मुझसे पूछो ऐ दुनिया वालों कि सच क्या है – 

 सच तो ये है कि, 

चाँद को छुपाने वाला बादल ही हमसे जलता है। 

हम में से कोई एक गिरता है, तो कोई एक सिलता है, 

और वो चाँद हर रात एक नई खुशी में खिलता है। 

कोई न कहे बेवफा मेरे चाँद को, 

वो तो अपनी खूबसूरती में अनजान है, 

नही जानता है वो कि, 

उसे सजाने वाले आकाश की भी हमसे ही शान है। 

निशब्द प्रेम 


वक्त वक्त की बात है; 

मैं ठहरी थी, वो भी ठहर गया;

मैं चली, वो भी चल पड़ा;

हर मोड़ का अनोखा संगम रहा,

जज़्बात भी कुछ नाज़ुक थे ज़्यादा

और मुझे भी प्यार की वहम हुआ |
हालातों के सितम का भी असर हुआ;

वो दूर चला गया था निशब्द,

और मैं किसी मजनूँ की लैला बनी |

चाहा टूट कर एक-दूसरे को था,

ज़र्रा-ज़र्रा रोशन किया था उसने मेरा;

मन के बूटे-बूटे पर था उसका ही नाम,

हर मर्ज़ पर किये थे मैंने खर्च तमाम;

पर इस मर्ज़ के असर से मुझे आराम हुआ था | 

दुआ में हाथ उठाकर, अरदास लगाये थे मैंने,

तब वो दूर चला गया था निशब्द;

और मैं किसी मिर्ज़ा की साहिबा बनी |
खिलने वाले फूल सब मुर्झाये क्यूँ,

वादा तो रहा था उनका, पर वो न आये क्यूँ;

लिख-लिख कर खतम हुई ये सियाही, 

बनी थी जो मेरे अश्कों के नीर से,

घाव बनाकर भी अन्जान रहा वो मेरे पीर से,

वो दूर चला गया था निशब्द;

और मैं किसी राँझे की हीर बनी |
आया जो लौटकर वो राहों में मेरे,

काँप उठे थे अरमान सारे बाँहों के मेरे,

इल्तज़ा जो की थी पूरी भी हो रही थी,

उसके शब्दों के तीर से मैं अधूरी हो रही थी;

इकरार के अरसे बीत चुके थे, 

खिजा में मैं अब भी जी रही थी |
उसने जी भर के मुझे निहारा, प्यार किया;

सूखे-सूखे नैन मेरे बरस रहे थे,

प्रिय को पाने के लिये तरस रहे थे,

पर मैं वही खड़ी रही निशब्द और वो…..